सीधी जिले में रेलवे में भूमि अधिग्रहण के बर्षो बाद भी रेलवे की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं लोग

सीधी धर्मेंद : ललितपुर सिंगरौली रेल लाइन को लेकर सीधी जिले के लोगों ने अपने दिलों में बड़े अरमान सजा रखे हैं सीधी जिले में रेल आने का सपना माता शबरी के भगवान राम को देखने के सपने से भी कठिन हो गया है विगत कुछ वर्षों से भारत सरकार द्वारा ललितपुर सिंगरौली रेल लाइन के निर्माण को लेकर दिखाई गई दरियादिली के चलते जिले के लोगों में तरह-तरह के सपने हीलोर लेने लगे थे जिले के लोगों को लगने लगा कि रेल आने से अब इस जिले में भी कई दशकों बाद खुशहाली आएगी तरक्की आएगी विकास आएगा रोजगार आएगा लोग संपन्न होंगे लेकिन लोगों के सारे सपने आज भी अधूरे पड़े हैं इन सपनों की पूर्ति के लिए सीधी जिले के अनेक किसानों ने अपनी जमीन रेलवे को भूमि अधिग्रहण में दे दी जिनमें से बहुतों को तो अभी तक उनका मुआवजा भी नहीं मिला जिनको मुआवजा मिल गया उनमें से बहुतों को आज तक नौकरी नहीं मिली वह दर-दर भटक रहे हैं उनके हाथ से जमीन भी चली गई और नौकरी की ललक में अब घर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है सीधी जिले के ऐसे ही 2 दर्जन से भी ज्यादा लोग रेलवे में जमीन देने के बाद नौकरी नहीं पाने के बाद दर-दर भटक रहे हैं 19 सितंबर को रेलवे में नौकरी की आस लगाए लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिले के कलेक्टर को अपनी समस्या का ज्ञापन सौंपा जिसमें बताया गया है कि रेलवे ने हमारी जमीनों का अधिग्रहण 2015 एवं 17 में कर लिया था और रेलवे क्राइटेरिया के अनुसार 11-11-2019 के पूर्व सभी अवार्ड पारित है कुछ किसानों का मेडिकल भी हो गया है कुछ किसानों का ऐसा भी भरवा दिया गया है कुछ किसानों का भी मेडिकल नहीं कराया गया है इनमें से कुछ को नौकरी मिल गई है बहुत नौकरी के लिए अब दर-दर भटक रहे हैं जिले के अधिकारियों और रेलवे के आला अधिकारियों से कई बार फरियाद की गई लेकिन आज तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई नौकरी न मिलने से अब उन्हें घर परिवार मे ताने भी मिलने लगे हैं जिला कलेक्ट्रेट में अपनी फरियाद लेकर आए रेलवे में नौकरी के पात्र लोगों ने एन टीवी इंडिया न्यूज़ को अपनी समस्या बताई और कहा कि हमने इस समस्या को रेलवे के आला अधिकारियों जिले के सांसद और कलेक्टर से कई बार उठाया लेकिन हमें आज तक नौकरी नहीं मिली! फरियादियों ने बताया कि पूर्व में जब वह अपनी नौकरी को लेकर जबलपुर जीएम ऑफिस के सामने आंदोलन कर रहे थे तब माननीय सांसद महोदय द्वारा जबलपुर जाकर उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उनकी जल्द से जल्द नियुक्ति की जाएगी लेकिन आज तक उनकी नियुक्ति नहीं हो पाई है। सीधी जिले में रेल आने का सपना विगत कई पीढ़ियों से देखा जा रहा है वर्तमान पीढ़ी ने रेलवे भूमि अधिग्रहण का काफी काम देख लिया बहुत अभी अपनी भूमि अधिग्रहण का ही सपना लिए जी रहे हैं सीधी जिले की धरती में आकर पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री ने आश्वासन दिया था कि 2022 में रेल सीधी की धरती में आ जाएगी लेकिन 2022 बीतने चला रेल का तो पता नहीं इस जिले के लोगों को ललितपुर सिंगरौली रेल लाइन की पटरी भी देखने को नहीं मिली जिसके लिए जवाबदार सिर्फ जिले के जनप्रतिनिधि नहीं जनता भी उतनी ही जवाबदार है क्योंकि सीधी जिले की जनता अपने अधिकार के लिए खुद प्रयास नहीं करती बल्कि जनप्रतिनिधियों के वादों पर भरोसा करके अपने सपनों को पूरा होने का इंतजार करती है इसलिए जनता के हाथ आज भी खाली हैं और यही हाल रहा तो आगे भी खाली रहेंगे इतना ही नहीं उन्हें मुआवजा और नौकरी के लिए भी इसी तरह से दर दर भटकते रहना पड़ेगा।
