25 अगस्त से 08 सितम्बर 2021 तक मनाया जा रहा है राष्ट्रीय नेत्र-दान पखवाडा

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सीधी धर्मेंद : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाँ0 बी0एल0 मिश्रा ने बताया कि 25 अगस्त से 08 सितम्बर 2021 प्रदेश सहित जिले में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है उन्होने बताया कि प्रदेश में लगभग 8.50 लाख लोग अंधत्व से पीडित है तथा नेत्रदान व कार्निया प्रत्यारोपण का प्रतिशत अत्यंत ही कम है इसमें प्रगति लाने हेतु आम लोगो को मृत्यु उपरान्त नेत्रदान हेतु प्रोत्साहित करना और नेत्रदान से जुडी भ्रातियॉ को दूर करना कार्निया ट्रासंप्लांट के बारे में लोगो को जागरुक करना इस पखवाडे़ का उद्देश्य है, ताकि अधिक से अधिक नेत्रदान एवं कार्निया प्रत्यारोपण हो सके। किसी भी उम्र के स्वस्थ्य व्यक्ति की कार्निया प्रत्यारोपित हो सकती है। जिनकी मृत्यु आकस्मिक, दुर्घटना, हार्ट अटेक या लकवे ,ब्लडप्रेशर, मधुमेह, अस्थमा, हृदय रोग के कारण हुई है जिनका कार्निया उत्तम माना जाता है। तथा जिनकी मृत्यु सेप्टीसीमिया, वायरल संक्रमण, जलकर ,डूबकर, जहर खाकर, फांसी से, टीबी, क्रनिक बुखार, सिफलिस, एड्स से हुई हो, के व्यक्ति का कार्निया उपयोगी नही होता है। कार्निया प्रत्यारोपण में पारदर्शी कार्निया प्रत्यारोपड़ करते है। यह खास प्रकार की माइको्रसर्जरी है, जिसमें दान की हुई ऑख से पारदर्शी कार्निया निकालकर मरीज के आपरदर्शी कार्निया की जगह लगा देते है । नेत्र दानदाता को जीते-जी नेत्रदान की घोषण-पत्र, जिसमें स्वयं की हस्ताक्षर के साथ घर के किसी सदस्य एवं परिचित या मित्र के हस्ताक्षर उपरान्त निकटतम नेत्र बैक मे जमा करना होता है । मृत्यू के बाद 4 घंटे के अन्दर मृत्यू की सूचना नेत्र बैक को फोन से देनी होती है। नेत्र बैक का कोई डाक्टर, व्यक्ति के घर जाकर मृतक की आंख का सिर्फ कार्निया निकालकर, खाली जगह पर आर्टिफिशियल  कांटेक्ट लेन्स लगा देते है, ताकि नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की चेहरा विकृत न दिखे। दान से प्राप्त कार्निया को 48 घंटे के अन्दर प्रत्यारेपित कर दी जाती है यह पूर्णतः निःशुल्क है। मनुष्य के शरीर में आखो का बहुत महत्व है । नेत्रदान से किसी ऐसे व्यक्ति को रोशनी मिलती है जिसकी कार्निया खराब होती है। कार्निया को विभिन्न प्रकार की बीमारियो से बचाने के लिए जरुरी है कि बच्चो को नुकीली वस्तुए न खेलने दे, चोट सक्रमण से बचायें । होली में रंगो को ऑख में न डाले, दीपावली पर नजदीक से फटाके न जालयें तथा ऐसे कार्यो को प्रोत्साहित न करे, ‘‘ध्यान रहे नेत्रदान सिर्फ मरणोपरान्त ही किया जाता है ।

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