राखी का निर्माण लोकल फार वोकल का एक सशक्त उदाहरण जन शिक्षण संस्थान की महिलाऐं कर रहीं डिजानर राखियों का निर्माण

सीधी धर्मेंद : आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने हेतु यह आवश्यक है कि हम अपनी रोजमररा की आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति हेतु आवश्यक वस्तुओं का घर पर ही निर्माण करें ताकि हमें बाजार में उपलब्ध सामग्री पर बहुत ज्यादा निर्भर न होना पड़े। सरकार की लोकल फार वोकल की अवधारणा को मूर्त रूप् प्रदान करते हुए संस्थान की महिलाओं द्वारा रखा बंधन के पावन पर्व पर डिजायनर राखियों का निर्माण कर उन्हें व्यवसाय का माध्यम बनाकर आय अर्जित करने का यह तरीका लोकल फार वोकल का एक सशक्त उदाहरण है। यह विचार संस्थान की महिलाओं द्वारा निर्मित राखी का अवलोकन करते हुए संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती मंजू सिंह द्वारा व्यक्त किया गया। कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं सव्यसांची सेंटर सीधी के माध्यम से जिले मे संचालित जन शिक्षण संस्थान की पूर्व एवं वर्तमान महिला प्रशिक्षणार्थियों द्वारा ’’लोकल फार वोकल की मुहीम में अपना योगदान देते हुए इस वर्ष भी रक्षाबंधन के त्यौहार को दृष्टिगत रखते हुए विदेशों मे निर्मित राखी का बहिष्कार एवं स्वदेशी राखी अपनाने की मुहिम मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हुये अपने घरों पर ही डिजायनर राखियों का निर्माण कर रही है तथा निर्मित राखियों को मार्केट में बेच कर आय का जरिया बनाते हुए आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। महिलाएं कोरोना संक्रमण हेतु भारत सरकार तथा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन कराते हुये सोसल डिस्टेन्सिंग रख कर घरों में राखियों का निर्माण कर रही हैं। इस हेतु आवश्यक कच्चा माल उन्हें अपने घरों के अलावा स्थानीय स्तर पर भी आसानी से उपलब्ध हो रहा है। व्यापक पैमाने पर हो रहे इस राखी निर्माण के अपने इस हुनर को महिलाओं ने बाजार से जोड़ने तथा बाजार में इन्हें बेच कर इसे आय का जरिया बनाने की ठानी है। कोरोना संकट काल में लाक डाउन के दौरान फेस मास्क का निर्माण तथा वितरण का इनका अपना अनुभव इन्हें इस कार्य को करने की प्रेरणा दे रहा है संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी एवं क्षेत्र समन्वयक के माध्यम से समय-समय पर महिलाओं को मार्गदर्शन एवं दिशानिर्देश दिया जाता रहा है ताकि इन्हें कच्चे माल की उपलब्धता तथा निर्माण की नवीन तकनीकों एवं बाजार के लिए भटकना न पड़े। राखी निर्माण की इस मुहीम में सीधी जिले के इन्द्रप्रस्थ नगर से अनुदेशिका श्रीमती रितू सोधिया, अर्जुन नगर से रूचि सिंह और उनकी सहयोगी महिलाओं द्वारा एक हजार से अधिक आकर्षक राखियों का निर्माण कर बाजार में उतारा गया इसी प्रकार ग्राम पंचायत अमहा, भितरी, रामपुर नैकिन, टीकटकला से ममता यादव, माया निगम, विद्दोतमा सिंह, शोभा सिंह द्वारा भी संस्थान की पूर्व महिला प्रशिक्षणार्थियों के सहयोग से पाच-पाच सौ से अधिक राखियों का निर्माण कर स्थानीय बाजार में विक्रय कर अपनी आय का जरिया निर्मित किया है। संस्थान के निदेशक जय सिंह द्वारा संस्थान की महिलाओं के राखी निर्माण के प्रति उत्साह को देखते हुये यह कहा गया कि किसी भी परिस्थिति मे यदि हौसला हो तो हर मुस्किल से लड़ा जा सकता है महिला प्रशिक्षणार्थियों द्वारा घर पर राखी निर्माण का यह प्रयास अपने आप में एक अनूठा प्रयास है यदि उन्हें अपनी आय अर्जित करने के इस प्रयास में सफलता मिलती है तो ये महिलाऐं प्रोत्साहित होकर अन्य बहुत सी सामग्रियों का निर्माण कर उन्हें बाजार प्रदान करने की पहल जारी रखेंगी।
