मुसलमान भाइयो ने ताजिया निकाल कर मनाया मातमी त्यौहार मुहर्रम

सीधी धर्मेंद : मुसलमान भाई मुहर्रम महीने के १० वें दिन को ‘आशूरा’ कहते है। आशूरा के दिन हजरत रसूल के नवासे हजरत इमाम हुसैन को और उनके बेटे घरवाले और उनके साथियों (परिवार वाले) को करबला के मैदान में शहीद कर दिया गया था। मुहर्रम हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों की इराक के कर्बला (Karbala) के मैदान में शहादत को याद करते हुए मातम मनाया जाता है।मुहर्रम में निकलने वाले ताजिया हजरत इमाम हुसैन और हजरत इमाम हसन के मकबरों के प्रतिरूप होते हैं। सीधी जिले और सीधी शहर में मुसलमान भाइयो ने मातमी त्यौहार मुहर्रम रश्मी तौर पर ताजिया निकाल कर मनाया 20 अगस्त को मुसलमान भाइयो ने ताजियों को जामा मस्जिद के पास रखा जहा पर मुसलमान भाइयो ने सिन्नी चढ़ाई और लंगर बांटे कोरोना की वजह से मुसलमान भाइयो ने इस बार ढोल ताशे और लाठी पटा का प्र्दर्शन नहीं किया और देर रात ताजियों को जामा मस्जिद से लेकर लालता चौक में ठंडा किया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
