प्रभावी क्रिन्यानवयन के लिए पाक्सो एक्ट पर जिला स्तरीय मास्टर टेनर्स का प्रषिक्षण संपन्न हुआ

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सीधी धर्मेंद : 24 मार्च को लैंगिक अपराधो से बालको का संरक्षण अधिनिय 2012 एवं नियम 2020 के प्रावधानो के प्रभावी क्रिन्यानवयन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग सीधी द्वारा जिला स्तरीय मास्टर टेªनर्स का प्रषिक्षण जनपद पंचायत सभागार सीधी मे आयोजित किया गया। प्रषिक्षण मे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीष व सचिव, विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी श्री देवीलाल सोनिया द्वारा पाक्सो एक्ट के प्रावधानो का विस्तार पूर्वक उपस्थित प्रतिभागीयों को जानकारी देते हुए बताया गया कि अधिनियम मे 18 वर्ष से कम आयु के सभी लिंग जाति व धर्म के बालको को सुरक्षा प्रदान की गयी है। अधिनियम मे स्पर्ष द्वारा किये गये लैंगिक हमला, बिना स्पर्ष के लैंगिक हमला व लैंगिक उत्पीडन के लिए अलग-अलग धाराओं मे दण्ड का प्रावधान किया गया है यदि कोई व्यक्ति अपराध करने के लिए दुष्प्रेरित करता है तो वह भी उसी प्रकार के दण्ड से दण्डित होगा जैसे अपराध कारित करने वाला व्यक्ति दण्डित होगा। श्री सोनिया द्वारा यह भी बताया गया कि यदि किसी भी व्यक्ति को किसी बच्चे के साथ लैंगिक उत्पीडन होने अथवा होने की संभावना की सूचना प्राप्त होती है तो उस व्यक्ति का अधिनियम मे स्थानीय पुलिस, विषेष किषोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाई को सूचना दिया जाने का दायित्व निर्धारित किया गया है। सूचना न दिये जाने की स्थिति मे अधिनियम की धारा 21 मे दण्डित किये जाने का प्रावधान है। पुलिस उप अधिक्षक नीरज नामदेव द्वारा महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण हेतु जिले के समस्त पुलिस थानो मे स्थापित उर्जा महिला हेल्प डेक्स के संबंध मे उपस्थित प्रतिभागियो को बताया गया। महिला हेल्प डेक्स मे हिंसा पीडित महिलाओं और बच्चों की सुविधा हेतु सभी थानो मे महिला उप निरीक्षक को प्रभारी बनाया गया है ताकि महिलाये अपनी समस्या निःसकोच हेल्प डेक्स प्रभारी को बता सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास अवधेष सिंह द्वारा म0प्र0 षासन की बच्चों हेतु संचालित समेकित बाल संरक्षण योजना के बारे मे जानकारी दी गयी। श्री सिंह द्वारा बताया गया कि समेकित बाल संरक्षण योजना अंतर्गत विधि प्रतिकूल बालको हेतु न्यायिक पीठ के रूप मे किषोर न्याय बोर्ड व देखरेख व संरक्षण की आवष्यकता वाले बच्चो के पुर्नवास हेतु बाल कल्याण समिति स्थापित है। अनाथ व परित्यक्त बच्चों को पालने वाले परिवार की आर्थिक सहायता हेतु षासन द्वारा फास्टर केयर व स्पांसरषिप योजना संचालित की जा रही है तथा दत्तक ग्रहण हेतु कारा के माध्यम से आॅनलाइन प्रक्रिया की जाती है। परियोजना अधिकारी सीधी 02 श्रीमती रतन सिंह द्वारा बच्चों के हित में कार्य करने हेतु षिक्षको की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा गया कि परिवार के बाहर यदि बच्चे सबसे ज्यादा किसी के साथ समय व्यतीत करते है तो वह षिक्षक है इसलिए बच्चों के कार्य व्यवहार को समझने की आवष्यकता है। कठिन परिस्थिति मे रहने वाले बच्चों की कांउलिंग षिक्षको द्वारा की जा सकती है। किषोर न्याय अधिनियम के प्रावधानो की जानकारी देते हुए परिवीक्षा अधिकारी श्री अनुराग पाण्डेय द्वारा उपस्थित प्रतिभागीयों को बताया गया कि अधिनियम के अंतर्गत बालको का आयु निर्धारण धारा 94 के अनुसार किया जाता है। जिसमे षिक्षको का बहुत महत्व है। आयु निर्धारण के लिए प्रथमतः मेट्रिकुलेसन के लिए प्रमाण पत्र का अवलोकन किया जाता है उसके पष्चात बच्चे द्वारा प्रथम बार जिस विद्यालय मे प्रवेष किया जाता है। उसके स्कालर पंजी मे दर्ज जन्मतिथि को वरियता दी जाती है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए परियोजना अधिकारी सिहावल श्रीमती माधुरी सिंह द्वारा उपस्थित प्रतिभागीयो को गुड टच-बैड टच की जानकारी देते हुए बताया गया कि विद्यालय के प्रत्येक स्तर पर आयु अनुसार बच्चों को स्वयं को सुरक्षित रखने के उपायो के बारे मे बताना चाहिए। कम आयु के बच्चों को घर और विद्यालय पर ही यह बताना चाहिए कि षरीर के निजी अंगो को न तो किसी को छूने देना चाहिये और न ही दूसरे के निजी अंगो को छूना चाहिये कार्यक्रम मे डाॅ. षेषनारायण मिश्रा परियोजना अधिकारी सीधी, विभिन्न विद्यालयो के प्राचार्य उच्च श्रेणी षिक्षक, पुलिस विभाग से महिला हेल्प डेक्स प्रभारी उप निरीक्षक, आरक्षक, विषेष किषोर पुलिस इकाई के बाल कल्याण अधिकारी, श्रम निरीक्षक, चाइल्ड लाइन व महिला बाल विकास के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

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