कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर सेवा प्रदान करने वाले अस्थाई स्वास्थ कर्मी क्यों लगा रहे है कलेक्ट्रेट के चक्कर???

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कृतिका सीधी :

सीधी जिले में कोबिड महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के 200 से भी ज्यादा युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में अस्थाई तौर पर कोविड नियंत्रण के लिए रखा गया था जिन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर पूरे कोबिड काल में स्वास्थ्य विभाग की सेवा करते हुए मरीजों की सेवा की लेकिन अब जब स्थिति सुधर रही है ऐसे में सरकार और प्रशासन ने अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा जारी रखने से हाथ खड़े कर दिए हैं और उन्होंने 100 से भी ज्यादा कर्मचारियों की छटनी कर सूची जारी करने की बात कही है लेकिन एक पखवाड़े से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ना तो ऐसे अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों की छंटनी की सूची जारी की और ना ही काम कर रहे अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन दिया गया अपनी इसी समस्या को लेकर अस्थाई स्वास्थ्य कर्मी जिले के कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहे हैं कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहे अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी समस्या और पीड़ा सिटी हलचल के कैमरे में व्यक्त की और कहा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग उनकी समस्या पर ध्यान दें क्योंकि उनका घर परिवार अब भूखों मरने की कगार पर आ गया है। बेरोजगारी के इस दौर में रोजगार मिलने से खुश अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों ने कोविड काल में अपनी जान को दांव पर लगाकर काम किया लेकिन अब जब शासन प्रशासन को लग रहा है कि स्थिति में सुधार है वह अब ऐसे अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों से पल्ला छुड़ाना चाहती है जिन्होंने अपनी जान को जोखिम में लगा दिया ऐसे में अब सवाल खड़ा हो गया है उन अस्थाई स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन यापन पर जिनका रोजगार छिन रहा है इतनी मेहनत के बाद उन्हें अब फिर से रोजगार के लिए मारे मारे फिरना पड़ेगा फिर से रोजगार ढूंढना पड़ेगा।

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एनटीवी इंडिया न्यूज़

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