कलेक्टर द्वारा स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें जिले एवं विकास खंड स्तर के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।


कृतिका सीधी :
कलेक्टर रवींद्र कुमार चैधरी द्वारा स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें जिले एवं विकास खंड स्तर के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। सीएम हेल्पलाइन के अंतर्गत समय से लंबित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि सिहावल में सबसे अधिक शिकायतें लंबित है। उन्होंने दूसरे विकास खंडों में भी लंबित शिकायतों के निराकरण करने के लिए 3 दिन का समय देते हुए कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर श्री चैधरी ने निर्देशित किया है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएं तथा स्वास्थ्य विभाग से जननी सुरक्षा योजना, पोषण पुनर्वास केंद्र तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत हितग्राहियों को समय पर भुगतान किया जाए। उन्होंने निर्देशित किया है कि जिन विकास खंडों में यह भुगतान आज की स्थिति में लंबित है वहां के लेखापाल और विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था, कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम, दृष्टिहीन का नियंत्रण कार्यक्रम व पुनरीक्षित छय नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति के लिए इनके नोडल अधिकारी जिम्मेदार हैं। सभी अपने-अपने कार्यक्रम की समीक्षा करें और वांछनीय उपलब्धि से समय-समय पर अवगत कराएं। जिन विकास खंडों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की कमजोर प्रगति तथा कोरोना नियंत्रण कार्यक्रम में लापरवाही की गई है, वहां के विकास खंड चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करें। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास पोषण पुनर्वास केंद्रों की शतप्रतिशत क्षमता का उपयोग ना होने वाले केंद्रों की समीक्षा कर संबंधित परियोजना के सुपरवाइजर एवं सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी करें। जिन पोषण पुनर्वास केंद्रों में जांच के दौरान बच्चे कम भर्ती होना पाए जाएंगे वहां के परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास विभाग के साथ-साथ अब खंड चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती सभी बच्चों को डिस्चार्ज होने के बाद उनका फालो अप भी किया जाए। कलेक्टर श्री चैधरी ने निर्देशित किया है कि सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीयन स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाए तथा गर्भावस्था के दौरान उनका चार बार स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। सभी गर्भवती महिलाओं कि एच.आई.वी. जांच भी सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि विकास खंड चिकित्सा अधिकारी सुनिश्चित करें कि किसी भी गर्भवती महिला की डिलीवरी घर पर नहीं हो, बल्कि शत – प्रतिशत डिलीवरी अस्पतालो में ही हो। यदि घर पर डिलीवरी होना पाया जाता है तथा डिलीवरी के दौरान जच्चा बच्चा की मृत्यु होती है तो वहां की ए.एन.एम. व स्वास्थ्य कार्यकर्ता को पद से पृथक किया जाएगा। गत दिनों में प्रसव के दौरान हुई मातृ-मृत्यु को ध्यान में रखते हुए उन कारणों की पुनरावृति नहीं होना चाहिए जिसके परिणाम स्वरूप दूसरी गर्भवती महिलाओं के जीवन को खतरा हो।

एनटीवी इंडिया न्यूज़
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