खनिज विभाग के संरक्षण में हो रहा रेत का अवैध उत्खनन

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ग्रामीणों की कई बार सूचना के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

सीधी:धर्मेंन्द्र

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जिले के बड़े रेत माफिया पर खनिज अधिकारी क्यूए रहमान की मेहरबानी होने से शासन को लाखों की राजस्व चपत लगने के साथ ही ग्रामीणों के विरोध के चलते बड़े विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। जिले में खनिज के संरक्षण के लिए जिम्मेदार खनिज विभाग की सांठ-गांठ के चलते रेत का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन हो रहा है। जिसकी सुर्खियां मीडिया के साथ ही जिले भर में होने के बाद भी खनिज अधिकारी पूरी तरह से मूक दर्शक बने हुए हैं। दरअसल मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रतिवर्ष की भांति बरसात के मौसम में नदी से रेत का उत्खनन 30 सितंबर तक प्रतिबंधित कर दिया गया है जिससे इन दिनों अवैध तरीके से बहरी तहसील के कई ग्राम पंचायतों में गोपद नदी से रेत निकासी बरसात के चलते देखो अंदाज में धड़ल्ले से की जा रही है। इलाके के कई स्थानों पर सैकड़ों ट्रक रेत की डंपिंग भी रोज हो रही है। जहां से अनुमानित 50 हाईवा रेत की विक्री रोजाना हो रही है। फिर भी डंप स्थल पर हर समय 100 हाईवा रेत मौजूद रहती है। रेत की व्यवस्था अवैध रूप से बनाने के लिए डंप स्थल में तीन टूलेन मशीनें खडी की गई हैं। शाम ढलते ही मशीनें गोपद नदी तट पर पहुंच जाती हैं। यहां तडक़े तक अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जाता है। रात में ही दर्जनों हाईवा गोपद नदी तट से सीधे रेत की लोडिंग करने के बाद डंप स्थल तक पहुंचाने में लग जाते हैं। प्रतिबंध के बाद भी रेत का अवैध उत्खनन लगातार रात में कराने का विरोध जब स्थानीय ग्रामीणों द्वारा किया गया तो गुर्गों द्वारा उनकी बेरहमी से पिटाई की गर्ई। जिसमें चार ग्रामीण घायल भी हुए। एक का हांथ फ्रैक्चर होने के बाद भी रेत माफिया के इशारे पर उसकी रिपोर्ट तक बहरी थाना में दर्ज नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रूप से गोपद नदी के तट से रेत निकासी पूरी रात चलने की सूचना उनके द्वारा बहरी थाना पुलिस के साथ ही खनिज विभाग एवं राजस्व अधिकारियों को भी दी गई। फिर भी कोई कार्रवाई न होने पर मीडिया को भी जानकारी दी गई। करीब एक पखवाडे से पूरे बहरी क्षेत्र के रेत खदान से बडे पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन होने के बाद भी कोई भी विभाग मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझ रहा है।
एक दूसरे पर अधिकारी थोप रहे जिम्मेदारी
जिले में रेत के अवैध कारोबार को रोंकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा खनिज, राजस्व, वन विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई है। फिर भी यह समिति मौके पर कभी पहुंचकर जांच करने की जरूरत नहीं समझती है। रेत के अवैध कारोबार पर पुलिस द्वारा परिवहन में लगे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन जिन नदियों से रात में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्खनन होता है वहां न तो खनिज या राजस्व अमला और न ही पुलिस जाती।  रेत का अवैध उत्खनन होने के बाद भी कार्रवाई न होने को लेकर जहां बहरी थाना पुलिस का कहना है कि यह कार्य खनिज विभाग का है। खनिज विभाग के अधिकारी मौके पर आएं और यदि उन्हें पुलिस की जरूरत है तो उपलब्ध कराया जाएगा।
उधर राजस्व विभाग के खंड स्तरीय अधिकारियों का कहना है कि रेत के अवैध मामले पर कार्रवाई करने के लिए उनके पास अमला नहीं है। यह कार्रवाई खनिज या पुलिस विभाग ही कर सकता है। उधर वन विभाग के अमले का कहना है कि गोपद नदी के समीप से वन भूमि भी है। उनकी भूमि पर रेत का अवैध उत्खनन नहीं हो रहा है। इस मामले में सही जानकारी एवं कार्रवाई खनिज विभाग ही कर सकता है।
कुल मिलाकर टास्कफोर्स में शामिल सभी विभागों के अधिकारी एक-दूसरे पर ही जिम्मेदारी थोप रहे हैं। वहीं क्षेत्रीय ग्रामीणों का आरोप है कि सभी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से रेत के अवैध कारोबार को संरक्षण देकर अपना नजराना वसूल रहे हैं।
इनका कहना है
मुझे बहरी तहसील के अन्तर्गत रेत खदानों में हो रहे अवैध रेत उत्खनन की कोई जानकारी नहीं है। मैं इस मामले को दिखवाता हूं।
क्यू.ए. रहमान
खनिज अधिकारी, सीधी
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