शिवराज सरकार का बजट जनता के साथ छलावा: दीपू

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सीधी:धर्मेंन्द्र

प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा  कोरोना महामारी के बीच अध्यादेश के माध्यम से लाया गया वर्ष 2020 21 के आम बजट को कांग्रेस पार्टी ने बेहद  निराशाजनक बताते हुए प्रदेश के  विकास पर गहरा आघात करने वाला जनता के साथ छलावा करार दिया है।
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कांग्रेस पार्टी के जिला प्रवक्ता  प्रदीप सिंह दीपू ने जारी बयान में कहा है कि मध्यप्रदेश का 2020-21 का वजट अध्यादेश कोरोना महामारी की असामान्य परिस्थितियों में लाया गया है जो बेहद ही निराशाजनक एवं प्रदेश की प्रगति को अवरुद्ध करने वाला है। भाजपा सरकार ने इस बजट में सबसे बड़ा कुठाराघात कृषि क्षेत्र में  किया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश मूलतः कृषि प्रधान प्रदेश है। यहाँ की 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। किसानों की क्रय शक्ति बढ़ने पर ही मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था सुचारू होती है। मगर प्रदेश भाजपा सरकार ने 2019-20 की तुलना में 2020-21 के अध्यादेश बजट  में कृषि में 53.64 प्रतिशत बजट में कमी की है और हॉर्टिकल्चर में 46.72 प्रतिशत की भारी कमी की है। बजट प्रावधानों में कृषि क्षेत्र में इतनी बड़ी कटौती का सीधा सा अर्थ है कि समूचे  प्रदेश के विकास के चक्के को जाम कर देना।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में आते ही जय किसान फसल ऋण माफ़ी योजना को रोककर यह संकेत दिए थे कि यह सरकार किसानों के हित में काम करने वाली नहीं है, मगर इस तरह वो बजट में प्रदेश को  इतना बड़ा नुकसान पहुँचाएगी इसका अनुमान किसी को नहीं था।  शिवराज सिंह के इस बजट में एमएसएमई के बजट में 34.72 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे निश्चित ही प्रदेश के विकास पर दोहरी मार पड़ेगी। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश के इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर भी इस बजट से बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि  शहरी विकास विभाग में  56.90 प्रतिशत की कमी की गई है और पीडब्ल्यूडी के सड़क निर्माण में 24 प्रतिशत की कमी की गई है। इस महामारी की दशा में कम से कम ये उम्मीद तो सरकार से थी कि वो प्रदेश के नागरिकों के  स्वास्थ्य का ख़याल रखेगी, मगर स्वास्थ्य और चिकित्सा- शिक्षा में भी कटौती करके सरकार ने अपने उत्तरदायित्वों से पीछा छुड़ाने की अमानवीय कोशिश की है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रदीप सिंह ने कहा कि शिवराज सरकार द्वारा लाए गए  बजट अध्यादेश का अवलोकन करने पर साफ़ प्रतीत होता है कि इस बजट में महिलाओं, आदिवासी भाइयों, पिछड़ों, दलितों, युवकों और किसानों, अर्थात् समाज के किसी भी वर्ग के साथ न्याय नहीं किया गया है।
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