बढ़ौरा शिव मंदिर में भक्तों और श्रद्धालुओं के बीच श्रावण मास में बनी दूरियां

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मंदिर के द्वार पर जल चढ़ाकर मायूस लौटे श्रद्धालू

आर.बी.सिंह राज 

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जिले से महज 17 किलोमीटर दूर भगवान भोलेनाथ का धाम बड़ौरा शिव मंदिर अपने लोक मान्यताओं के लिए श्रद्धालुओं के बीच में बेहद बड़ी आस्था का केंद्र रहा है और खासकर यहां सावन के महीने में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती रही है। परंतु इन दिनों लॉकडाउन के चल रहे दौर में भगवान शिव को भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर एहतियात के तौर पर उनके ही मंदिर में कैद कर दिया गया है।
बढ़ौरा नाथ के पुजारी राजेश पूरी गोस्वामी द्वारा बताया गया कि यह मंदिर आजादी के दशक के पहले से बना हुआ है। जहां जिले के लोग ही नहीं बल्कि देश प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालु अपनी अर्जी लेकर भगवान के चरणों में आश लगाकर आते हैं। बताया जाता है कि बढ़ौरा शिव मंदिर में बाबा बैजनाथ धाम के बाद बढ़ौरा धाम दूसरा ऐसा धाम है जहां गठबंधन एवं कामर के साथ जल चढ़ता है।
ऐसी मान्यता रही है कि भगवान भोलेनाथ के मंदिर में जो भी श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर मन में आता है कहीं न कहीं उसकी अर्जी भगवान जरूर सुनते हैं।
श्रावण मास में मंदिर के बाहर जल चढ़ाकर लौट रहे श्रद्धालु
 बता दें कोरोना महामारी को बढ़ते हुए देखकर जिला कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी के द्वारा बढ़ौरा शिव मंदिर में एहतियात के तौर पर गेट को बंद करा दिया गया है एवं परिषर से दुकानों को हटवा दिया गया है। जिसकी वजह से श्रद्धालुओं को दर्शन एवं जल चढ़ाने के लिए नहीं मिल रहा है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा आदेशित किया गया है कि 5 श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर दर्शन के लिए भेजा जाए तो पुलिस प्रशासन के लोग बढौरा शिव मंदिर के चौराहे से ही श्रद्धालुओं को क्यों वापस लौटा रहे हैं। सोमवार एवं तेरस के दिन ही श्रद्धालुओं के साथ ऐसा क्यों।
जंगल और सड़कों के किनारे हो रहे कथा एवं मुंडन संस्कार
बढौरा शिव मंदिर में तेरस के दिन श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर शिव मंदिर में कोई कामर चढ़ाने तो कोई मुंडन संस्कार कराने एवं कोई कथा सुनने आता है। लेकिन प्रशासन के द्वारा मंदिर के अंदर ही नहीं बल्कि चौराहे से ही श्रद्धालुओं को लौटा दिया गया। जिसके कारण पंडितों के द्वारा श्रद्धालुओं को बुलाकर शोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए।जंगल एवं रोड के किनारे ले जाकर भगवान की कथाएं सुनाई जा रही हैं।
पंडित एवं नाई का कहना है
 जिला क्लेक्टर का ध्यान आकर्षित कराते हुए मंदिर  से जुड़े हुए पंडित एवं नाई लोगों ने कहा कि पंडित एवं नाई के लिए एक उचित जगह दे दिया जाए जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कथा एवं मुंडन संस्कार किया जा सके। जिसके कारण हम गरीब ब्राह्मण एवं गरीब नाइयों के बाल बच्चों का भरण-पोषण हो सके।
दुकानदारों की मांग
शिव मंदिर  के आसपास  दुकान लगाने वालों ने  जिला प्रशासन से मांग की है कि चौराहे से पूरी जनता को ना लौटाकर कम से कम पांच पांच श्रद्धालुओं को मंदिर के अंदर आने दिया जाए जिससे हम सभी दुकानदारों का पेट चल सके ,नहीं तो हम लोग दुकान का किराया ना जमा कर पाएंगे एवं अपने बीबी बच्चों का भरण पोषण नहीं कर पाएंगे।
इस कोरोना महामारी में हम लोगो के पास अब जीवन जीने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
शिव मंदिर बढ़ौरा नाथ की इतनी मान्यता है कि मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट के सबसे बड़े जज भी अपनी मन्नतों को लेकर शिव मंदिर बढ़ौरा नाथ में घंटों पूजा अर्चना भी कर चुके हैं। ऐसे मंदिर की मान्यताओं के लिए कम से कम शासन प्रशासन 5 लोगों को आने की अनुमति प्रदान करें।
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