हौसले अगर बुलंद हो तो रास्ते आसान हो जाते हैं और मंजिल तक पहुंचने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती; पूरी कहानी देखे यहां.

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कृतिका सीधी :

 

हौसले अगर बुलंद हो तो रास्ते आसान हो जाते हैं और मंजिल तक पहुंचने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आती। गृहस्थी का काम करते हुए घर तक सीमित रहने वाली सिहावल विकासखंड के ग्राम चमरौंहा निवासी शांति पटेल ने कभी नहीं सोचा था कि वह घर की दहलीज पार कर कभी स्वयं का उद्योग स्थापित करते हुए आत्मनिर्भर बनेगी। लेकिन मप्र डे राज्य आजीविका मिशन के सहयोग और प्रोत्साहन से आज उसका स्वयं की डेयरी दुुकान हो गई है, अब वह स्वयं के साथ ही समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर प्रदान करते हुए अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखंड सिहावल के सहयोग से स्व-सहायता समूह के माध्यम से गांव की गरीब महिलाएं छोटी-छोटी बचत करने के बाद शासन एवं बैकिंग व्यवस्थाओं से जुड़कर अब आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढने लगी हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की मदद कर रही हंै, बल्कि पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश को सशक्त भी कर रही हैं। इसी कड़ी मे मप्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन विकासखंड सिहावल मे मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी ए बी सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सिहावल अशोक तिवारी, जिला परियोजना प्रबंधक संजय चैरसिया जिला सीधी के निर्देशानुसार व जिला मिशन प्रबंधन इकाई जिला सीधी के मार्गदर्शन एवं विकासखंड टीम के प्रयासों से सीता स्व-सहायता समूह ग्राम चमरौंहा (अमिलिया) की शांती पटेल द्वारा दूध डेयरी का कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसमे शत-प्रतिशत प्राकृतिक तरीके से समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित समस्त प्रकार के दुग्ध उत्पाद बिक्री हेतु रखे जाएंगे। साथ ही बाजार मांग के आधार पर समूहों द्वारा निर्मित अन्य उत्पाद भी तैयार किएं जाएंगे। जिसमे लोंगो की स्वास्थ्य एवं सेहत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। शांती पटेल द्वारा सिहावल विकासखंड के अमिलिया कस्बा में आजीविका मिशन सिहावल के सहयोग से डेयरी की दुकान का शुभारंभ किया गया, इस डेयरी की दुकान में दूध, दही, मट्टा, पनीर, खोवा, घी आदि सामग्री का विक्रय किया जा रहा है। बाद में मिठाई व नमकीन आदि के उत्पादों के साथ दुकान का विस्तार किए जाने की योजना है। उक्त गतिविधि हेतु समूह की नकद साख सीमा एवं सामुदायिक निवेष निधि के माध्यम से समूह सदस्य शांती पटेल द्वारा 50 हजार का ऋण लेकर गतिविधि प्रारंभ की गई है, जिसे भविष्य मे ओर विस्तार दिया जाएगा। शांति पटेल ने कहा कि माह मई वर्ष 2016 में स्व-सहायता समूह से जुड़ने के पहले व केवल घर गृहस्थी तक ही सीमित थी, परिवार का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद परिवार की स्थिति में बदलाव होना शुरू हुआ, शांति ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि कभी उसकी स्वयं की कोई दुकान होगी, लेकिन आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने हौंसले बढ़ाने के साथ ही ऋण उपलब्धता को भी आसान बना दिया, जिससे आज मेरी स्वयं की डेयरी दुकान है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आजीविका मिशन रीढ़ की हड्डी का काम कर रहा है, आजीविका मिषन से जुड़कर गरीब महिला स्वयं तो मजूबूत व आत्मनिर्भर बन ही रही हैं, साथ ही परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करते हुुए समूह व गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।

 

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