पुलिस वाली मैम का बच्चे करते हैं इंतजार

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सायरन वाली गाड़ी आने पर चेहरे पर खिलती है मुस्कान

कृतिका: सीधी
सीधी जिले के आदिवासी अंचल मझौली में गरीब आदिवासियों के बच्चे तपती दोपहरी में पेड़ों के नीचे बैठकर सायरन वाली गाड़ी और पुलिस वाली मैम का इंतजार करते हैं।
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 गाड़ी के सायरन की आवाज सुनते ही भूख से बुझे बच्चों के चेहरों पर जैसे खुशी की लहर दौड़ जाती है। उन्हें उम्मीद रहती है कि अगर सायरन वाली गाड़ी आएगी तो पुलिस वाली मैम उनके लिए खाने-पीने की चीजें लेकर आएंगी। इसी उम्मीद के साथ बच्चे दिन भर गाड़ी के इंतजार में बैठे रहते हैं।
और फिर बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं
लॉकडाउन होने के बाद पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए हमारे कोरोना वॉरियर्स दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन वायरस का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस माहौल में पुलिस का भी एक नया रूप देखने को मिल रहा है। अक्सर अपने डंडे के जोर से डराने वाली पुलिस कोरोना संकट काल में आम लोगों के लिए सुरक्षा कवच बनी हुई है। ऐसा ही एक मामला जिले के मझौली से सामने आया है जहां छोटे-छोटे गरीब बच्चे सायरन वाली गाड़ी का इंतजार करते हैं, क्योंकि गाड़ी से आने वाली पुलिस मैम उनके लिए खाना लेकर आती है। ट्रेनी डीएसपी शाबेरा अंसारी का पुलिस में ह्यूमन टच का यह अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
भोजन के साथ बच्चों को बांटते हैं मास्क
ये पुलिस वाली मैम सायरन वाली गाड़ी से आकर ना सिर्फ भोजन बांटती हैं बल्कि भोजन के साथ साथ बच्चों को सैनिटाइजर और मास्क भी बांटती हैं। प्रशिक्षु डीएसपी तथा मझौली थाना प्रभारी शाबेरा अंसारी का इंतजार रोज आदिवासी अंचल के बच्चे किया करते हैं। वहीं मझौली अंचल में ऐसे पुलिस की सादगी से काफी लोग खुश नजर आते हैं अपनी अनोखी कार्यप्रणाली से इस पूरे  क्षेत्र में प्रशिक्षु डीएसपी काफी चर्चित हो चुकी हैं जो पुलिस वाली मैम के नाम से जानी जा रही हैं।
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