सूझ बूझ के चलते बची गर्भवती महिला की जान


सीधी
दिल में अगर सच्ची सेवाभाव की अलख हो तो बड़ी से बड़ी समस्या भी छोटी हो जाती है। कई परिस्थतियों में मार्ग के बाधक ही साधक का रूप धारण
कर लेते हैं।
गुरूवार को जिले में ऐसी ही एक घटना सामनें आयी जहॉ सही समय पर उपचार मिलने से 07 माह की गर्भवती महिला की जान बची जो कि पीडिता के लिये जीवन पर्यन्त न भूलने वाली घटना बन गयी।
बताया गया कि श्रीमती उषा कोल पति विनोद कोल निवासी उत्तर टोला बैरिहा, बहरी की तबियत विगत तीन दिनों से काफी खराब थी वहीं लगातार दस्त पेचिस के चलते शरीर में पानी की कमी भी हो गयी थी। पीडिता को उपचार हेतु बाहर ले जाने के लिये घर पर कोई भी महिला या सहयोगी मौजूद नहीं था, लॉक डाउन अवधि में पति परदेश में फॅसा हुआ था। सुविधा साधन के अभाव के चलते लगभग स्थिती अत्यंत समस्या भरी बन गयी थी।
चैन सिस्टम से की गयी मदद से बची जान

पीडि़ता के घर पर केवल पीडिता के ससूर लल्लू कोल थे जो कि वयोवृद्ध हैं। उक्त संपूर्ण घटना की जानकारी जब पड़ोसी स्मृति मिश्रा को मिली तो उन्होने समय न गॅवाते हुए सीधी में दवा विक्रेता सिराज अंसारी शमा मेडिकल स्टोर को घटना क्रम की जानकारी दी। जिस पर मदद पहुंचाने के लिए डॉक्टर सिराज अंसारी द्वारा कई प्रयास किये गये जो असफल रहे तब अंतिम में बिठौली हास्पिटल में पदस्थ डॉ. संजय पटेल से संपर्क कर अनुनय विनय किया गया, जहॉ चिकित्सक ने भी मानवता
को प्रथम धर्म मानते हुए स्वयं के व्यय पर बिना समय गंवाये अपनी कार से 40 किलोमीटर का रास्ता तय करके बताये पते पर पहुंचकर गर्भवती महिला का
इलाज एवं दवा वितरण का कार्य पूरी तरह से नि:शुल्क रूप से किया गया।
आज भी कहीं न कहीं इंसानियत जिन्दा है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण तो यह है कि चैन सिस्टम से श्रीमती उषा पटेल जो कि 07 माह से गर्भवती थी और स्थिति
कुछ इस कदर बन गयी कि स्वास्थय सुविधा मुहैया न होने के चलते जज्जा और बच्चा दोनो के प्राण संकट में आ गये थे उक्त घटना क्रम में चिकित्सक के
द्वारा नि:शुल्क सेवा एवं दवा वितरण का कार्य किया गया साथ डॉक्टर सिराज अंसारी और स्मृति के द्वारा सच्ची सेवा भाव का प्रमाण दिया गया।
