किसानों के लिए बजट निराशाजनक कहा उमेश तिवारी ने

सीधी धर्मेंद : टोंको.रोंको.ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी एक विग्यप्ति जारी करके कहा की केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए 34 लाख करोड़ रुपये के बजट में अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जो बजट पेश किया गया है उसने साबित किया है कि मोदी सरकार को आम भारतीयों की चिंता कतई नहीं हैए मोदी सरकार मात्र 5 उद्योगपतियों की सरकार है। पेश किए गए बजट में गैस पाइपलाइनए नई रेलवे लाइनए सड़कए एयरपोर्टए स्वास्थ्य सेवाए स्टील कारखाने को बेचने को कहा गया है। सब कुछ बेच कर पौने दो लाख करोड़ रुपए प्राप्त करना जनोन्मुखीम सरकार का काम नहीं हो सकता। घर की संपत्ति बेचकर बढ़िया गाड़ी खरीद कर मौज करने को विकास नहीं कहा जा सकता है। आगे उमेश तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट किसानों को निराश किया है। किसान को उम्मीद थी कि सरकार किसानों की संपूर्ण कर्जा मुक्ति तथा सभी कृषि उत्पादों का लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद की कानूनी गारंटी का प्रावधान बजट में किया जाएगा परंतु सरकार ने दोनों ही योजनाओं के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है। सरकार ने फिर से एक बार झूठ बोला है कि देश में लागत से डेढ़ गुना दाम पर खरीद की जा रही है। जबकि गेहूं और धान भी पूरे देश मे समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जा रहा है। 23 कृषि उत्पादों की समर्थन मूल्य पर खरीद दूर की बात है। श्री तिवारी ने कहा कि सरकार ने आत्महत्या पीड़ित किसान परिवारों के लिए तथा ऐसे क्षेत्रों के लिए जहां सबसे ज्यादा किसान आत्महत्या करते हैं उन किसानों के लिए भी कोई विशेष प्रावधान नहीं किया है। इसी तरह सरकार द्वारा खेतिहर मजदूर को रोजगार गारंटी देने के लिए मनरेगा में कृषि क्षेत्र के बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है। सरकार ने किसानों को पेंशन देने की बात भी बजट में नही कही है। बजट में कृषि उपकरणों से जी एस टी हटाने की बात नही की गई है साथ ही डीजल पर 4 रुपये और पेट्रोल पर 2ण्5 रुपये कृषि सेस लगाया गया है जिसका अर्थ है खेती महंगी होगी जिससे किसानो की आत्महत्या बढ़ेंगी। उमेश तिवारी ने कहा कि सरकार ने बीमा क्षेत्र में 74% विदेशी विनिवेश बढ़ाकर देश की बीमा कंपनियों को नष्ट करने की घोषणा कर दी है। विनिवेश के नाम पर सबकुछ बेच देने के विचार को सरकार ने अमली जामा पहना दिया है। सब कुछ बेच दूंगा एमोदी सरकार का नया नारा आज के बजट ने स्थापित कर दिया है। देश मे बजट भाषण में कॅरोना काल मे देश के लिए काम करने का श्रेय किसानों की जगह उद्योगपतियों को देकर उद्यगपति भक्ति का सबूत दिया गया है।
