जिला चिकित्सालय की दिनों दिन गिरती साख एवं मिल रही लगातार शिकायतों सहित व्यवस्था में सुधार लाने के मकसद से स्वास्थ संचालनालय भोपाल द्वारा डॉ. एस.बी.खरे की जगह पर डॉ. डी.के.द्विवेदी को जिला चिकित्सालय की कमान सौंपी गयी है। डॉ. द्विवेदी द्वारा सिविल सर्जन का पदभार ग्रहण करते ही शुरू के दो तीन दिन तक तो लगातार परिसर में स्वच्छता अभियान को गति दी गयी किन्तु उसके बाद फिर से पुराने ढर्रे की ओर चल पडे। वहीं वरिष्ट अधिकारियों की लचर व्यवस्था व उचित निर्णय न ले पाने के चलते जिला चिकित्सालय बदहाली की ओर अग्रसर होता जा रहा है। यहॉ आये दिन छोटी छोटी बतों को लेकर पीडि़त एवं परिजनों द्वारा सवालिया निशान लगाया जा रहा है।
हॉथ के दस्तानें की दरकार
जिला अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था का खामियाजा यहॉ आने वाले मरीज व उनके परिजनों को उठाना पड़ रहा है। विगत कई माह से जिला चिकित्सालय में छोटी छोटी अति आवश्यक सामग्रियों के लिये स्टाफ, नर्स एवं सेवा दे रहे चिकित्सकों को सिविल सर्जन के आगे रोना पड़ रहा है। उसके बावजूद आज दिनांक तक उक्त सामग्रियों की पूर्ति नहीं हो सकी है।
सूत्रो की मानें तो जिला चिकित्सालय में भर्ती प्रसव पीड़ा से जूझ रही पीडि़ता के उपचार हेतु स्वास्थयकर्मियों को प्रतिदिन लगभग सैकड़ो हॉथ के दस्ताने की आवश्यकता पड़ती है किंतु जिला चिकित्सालय में पर्याप्त मात्रा में दस्तानों की उपलब्धता न होने के चलते यहॉ भर्ती मरीज के परिजनों को प्रतिदिन बाजार से क्रय कर पूर्ति करनी पड़ रही है। प्रसव पीड़ा के पश्चात परिजनों को बाजार से कई बार सुई धॉगा लाना पड़ जाता है और बिलम्ब होने पर पीडिता के शरीर में खून की कमी तक हो जाती है। जिला अस्पताल में पदस्थ स्टाफ द्वारा समाज सेवकों से गुहार लगाई गयी है कि अगली बार जब भी दान धर्म का विचार आये तो अन्य सामाग्रियों के स्थान पर हॉथ के दस्तॉने दान में दें जिससे वास्तविक रूप में पात्र लाभांवित हो सकें।
शासन सत्ता बदली, कुर्सी बदली उसके बाबजूद जिला चिकित्सालय की लचर व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका। सूत्र बताते हैं कि यहॉ सुव्यवस्थित आपरेशन थियेटर की दरकार लम्बे समय से चली आ रही है किन्तु आज दिनांक तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। जिले में आये दिन गंभीर रूप से दुर्घटना व हादसों का शिकार होकर लोग उपचार हेतु जिला चिकित्सालय की ओर रूख करते हैं किन्तु यहॉ उपचार हेतु आवश्यक सामग्री की हमेशा कमी ही बनी रहती है। वहीं ज्यादातर प्रकरण में मरीजों को उपचार के स्थान पर सीधे उन्हे रीवा के लिये रेफर कर दिया जाता है। वहीं कई प्रकरणों में हद तो तब हो जाती है जब कि गंभीर रूप से चोंटिल व्यक्ति की हड्डीयों को जोडऩे के लिये प्लास्टर में लगने वाली सामग्री तक सिविल सर्जन द्वारा उपलब्ध नहीं करायी जाती है। वहीं कभी कभार कुुछ प्रकरणों में राजनैतिक हस्ताक्षेप एवं दबाब के बाद सीएस के द्वारा स्टाफ को मरीजों के उपचार हेतु प्लास्टर व अन्य सामग्री उपलब्ध करायी जाती है।
सिविल सर्जन को मीडिया से परहेज
जिला चिकित्सालय से लगातार आ रही शिकायतों एवं आरोपों में सत्यता की जानकारी हेतु मीडियाकर्मियों द्वारा कई बार सिविल सर्जन डॉ. डी.के.द्विवेदी से फोन माध्यम से संपर्क करने का प्रयास समय समय पर किया जाता है किन्तु अचरज की बात तो यह है कि श्री द्विवेदी द्वारा न तो कभी फोन उठाया जाता है न ही कभी काल बैक किया जाता है। हॉ ये बात जरूर है कि कई बार पीडि़तो की मृत्यू हो जाने व अन्य बड़ी घटनाओं के बाद अपने आप को दोष मुक्त साबित करने के लिये मीडिया का सहारा लिया जाता है।