मामला रामपुर नैकिन ब्लाक के अकौरी ग्राम का है जहां ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि 10 वर्ष पूर्व से स्वीकृत माइनर नहर को कई कम्पनियां अपने अपने तरीके से बनाकर सरकार से पैसा वसूल करती हैं एवं आधा-अधूरा कार्य बीच में ही छोड कर रफूचक्कर हो जाती हैं। वहीं बरसात के मौसम में घटिया निर्माण के कारण पानी जमा रहा है, पुल भी टूट चुके हैं, कुछ पुल तो मिट्टी भर जाने के कारण बंद हो चुके हैं।
उक्त नहर का कार्य विगत 10 वर्षो से कराया जा रहा है जिसमें अधिकारियों की मिली-भगत का ममला भी उजागर होता है।
सी.एम हेल्पलाइन पर अधिकारियों के द्वारा दी गयी जानकारी कुछ ऐसे है- दिसम्बर 2017 में अनुविभागीय अधिकारी महान नहर उपसंभाग सेमरिया द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में लेख है कि निर्माणाधीन कम्पनी द्वारा खराब मटेरियल का उपयोग किया जा रहा था जिसे उपयंत्री की देखरेख में गुणवत्तायुक्त सामग्री के उपयोग करते हुये निर्माण कार्य कराये जाने की अनुशंशा है।
वही मई 2016 में शिकायत उपरांत 25 अक्टूवर 2016 में कार्यपालन यंत्री महान नहर संभाग सीधी द्वारा जानकारी दी गयी है कि उक्त ग्राम में कोई पक्का निर्माण कार्य नहीं किया गया है, मिट्टी के कार्य में गुणवत्ता की जाॅच को भी सही बताया गया है। साथ ही पूर्व की व्ही.आर.बी को गुणवत्ता विहीन होने के कारण डिसमेंटल कर नए सिरे से कार्य कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया था।
माइनर नहर नम्बर 12 का निर्माण कार्य एग्रीमेंट 2010-11 मेसर्स एच.ई.एस इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद को टेंडर जारी किया गया था जिसे निरस्तीकरण की कार्यवाही कर नयी निविंदा आमंत्रित करने की बात भी जुलाई 2017 में की गयी है।
वर्ष 2017 से अब तक क्या निविंदा कार्य पूर्ण नहीं किया गया ? और यदि किया गया है तो क्या कागज में ही नहर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
इस पूरे क्षेत्र की जनता ने मध्यप्रदेश शासन तथा जिला कलेक्टर का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए इस नहर के कार्य को तत्काल पूर्ण कराए जाने की मांग की है।