राजनीति के शिकार दो डाक्टर्स के ट्रांसफर से और बढ़ेगी जिले की मुसीबत

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【आर.बी. सिंह राज】

*जिलेभर में चिकित्सकों की कमी बरकरार*

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शिशु रोग विशेषज्ञ एवं मेडिसीन रोग विशेषज्ञ का हुआ ट्रांसफर

जिले भर में वैसे ही विशेषज्ञ डाक्टरों का आभाव वर्षों से बना हुआ है। जो पदस्थ थे उनको भी वर्तमान राजनीति का शिकार बनाते हुए जहां उनके पद तो छीन लिए ही लिए गए साथ ही उन्हें दूसरे जिले में स्थानांतरित कर दिए जाने के कारण जिले की स्वास्थ्य सुविधा में और ज्यादा दिक्कतें होंगी।
उल्लेखनीय है कि बीते गुरुवार को सीधी जिले के प्रभारी सीएमएचओ डॉ. आरएल वर्मा एवं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एसबी खरे का स्थानांतरण होने को लेकर सत्ताधारी दल नेताओं पर सवालिया निशान उठना शुरू हो गये हैं ?
शासकीय सेवकों के लिए उनका स्थानांतरण एक जगह से दूसरे जगह या एक जिले से दूसरे जिले में किया जाना तो एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है परंतु वर्तमान परिस्थिति में यदि स्वास्थ्य विभाग की बात की जाए तो पूरा देश जहां कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहा है और सीधी जिले में भी कोरोना मरीज आए दिन अपनी नई संख्या बढ़ाते जा रहे हैं जिसके मद्देनजर जिले में पहले से ही चिकित्सकों की कमी झेलने वाला स्वास्थ्य विभाग इन दिनों इतनी विषम परिस्थिति के दौरान भी राजनीति का शिकार हो गया है।

*अंदाज-ए-शिकार पर सवाल ?*

वर्तमान की को रोना संक्रमण जैसी गंभीर परिस्थिति के दौरान  सीधी जिले के  सीएमएचओ एवं  सिविल सर्जन को  जो पहले से ही इसी जिले में  विशेषज्ञ चिकित्सक के रूप में पदस्थ थे तथा दोनों ही इन महत्वपूर्ण पदों पर सिर्फ प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे उन्हें ऐसे संकट काल में राजनीति का शिकार बनाया जाना गलत समय पर गलत निर्णय लेने  की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का परिचायक है। अतीत में भी इन दोनों महत्वपूर्ण पदों पर  इस जिले के ही अधिकांश चिकित्सक प्रभारी बनते रहे हैं और उन्हें  पद से हटाकर दूसरे चिकित्सकों को प्रभार दिया जाता रहा है परंतु इस मर्तबा तो  जिस तरह से  राजनीति का शिकार जिले के दो प्रभारी चिकित्सकों को बनाया गया है  उसके तहत उन्हें  प्रशासनिक जिला बदल भी कर दिया गया है। जिले की  लड़खड़ाती स्वास्थ्य व्यवस्था के मद्देनजर भले की जिले में पदस्थ 32 विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके पद से हटा दिया जाता लेकिन जिले में ही यदि उनकी पदस्थापना उनके मूल पदों पर ही की जाती तो कम से कम जिले के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं के मद्देनजर राजनीति के शिकार का शिकार नहीं होना पड़ता।
परन्तु सत्ता के नेताओं के दवाब मानें या फिर जो भी कारण हो उनका स्थानांतरण दूसरे जिले में होने से निश्चित रूप से चिकित्सीय व्यवस्था कमजोर होगी।
जिले में प्रभारी सीएमएचओ रहे डॉ. आरएल वर्मा जो मूल से चुरहट में शिशु रोग विशेषज्ञ थे, उनका स्थानांतरण जबलपुर कर दिया गया जबकि उन्हे भले ही पद से हटा दिया जाता परन्तु उनके मूल पद पर चुरहट में ही यथावत रखना जिले के लिए लाभदायक था क्योंकि जिले में बच्चों के डाक्टरों की कमी है।
यही स्थिति मेडिसीन डाक्टर को लेकर है, जिला चिकित्सालय में मेडिसीन डाक्टरों का आभाव है। डॉ. एसबी खरे मेडिसीन डाक्टरों में चर्चित रहे हैं। वे ऐसे डाक्टर हैं जिनसे प्रशासनिक अमले सहित जनप्रतिनिधि भी इलाज करवाते आ रहे थे। प्रभारी सिविल सर्जन उन्हे बनाया गया था, सत्ता के नेताओं को यदि लगा होगा कि सिविल सर्जन न रहे तो निश्चित उन्हें राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के मद्देनजर हटाया जा सकता था लेकिन उनका स्थानांतरण रीवा के लिए करा दिया गया। जरूरी था कि जिले में उनकी पदस्थापना यथावत रहती तो कई मरीजों का उपचार संभव होता।
इस तरह भाजपा की सरकार में देखा जाये तो अस्पताल में डाक्टरों की भरपाई करने की वजाय जो पदस्थ थे उन्हे भी दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। जिले भर की जनता जिला चिकित्सालय में उपचार कराने आती है लेकिन डाक्टरों के आभाव के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में जिले में दूसरे विशेषज्ञ डाक्टरों की पदस्थापना होना अति आवश्यक है। अभी तक जो भी प्रभार में सीएमएचओ या सिविल सर्जन रहते थे उन्हे पद से हटाने के बाद यथावत पदस्थापना की जाती रही है। यह पहला मामला है जिन्हे की पद से हटाने सहित अन्यंत्र ट्रांसफर किया गया। जिसका जिले की जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
वैसे भी सीधी जिले के संपन्न लोग जिले में अच्छे चिकित्सकों की उपस्थिति ना होने के कारण अपने परिवार का उपचार कराने रीवा सतना या अन्य जगह जाते हैं और अब यह दिक्कतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

*इससे भी बेहतर व्यवस्था होगी निर्मित : इन्द्रशरण*

भाजपा जिलाध्यक्ष इन्द्रशरण सिंह चौहान ने कहा कि ये प्रशासनिक व्यवस्था है, रही बात चिकित्सको की कमी की तो उससे भी ज्यादा बेहतर व्यवस्था होगी। ऐसी बात नहीं है कि दो डाक्टरों के कारण पूरी चिकित्सीय व्यवस्था खराब होगी। उन्होने कहा कि कुछ ऐसे भी डाक्टर थे जो मरीजों की सेवा करने के वजाय अपनी जेब भरने में ज्यादा ध्यान रखते थे। जिला चिकित्सालय में डाक्टरों की शीघ्र पदस्थापना करायी जाएगी।

*डाक्टरों की कमी की भरपाई होना जरूरी : बाबा*

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रूद्र प्रताप सिंह बाबा ने कहा कि जिला चिकित्सालय में डाक्टरों की कमी है लेकिन भाजपा के सरकार ने इस मामले में कोई पहल नहीं की। उन्होने कहा कि मेडिसीन डाक्टरों का बेहद आभाव है, यह गलत या सही है यह मेरा विषय नहीं है लेकिन आम जनता की सुविधाओं को देखते हुए पर्याप्त मेडिसीन डाक्टर का पदस्थापना होना जरूरी है।

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