क्या अर्जुन के सुत राहुल में मतदाता देख रहे हैं विकास की तस्वीर ?

0 1,122
Main Ad1

? कुंवर अर्जुन सिंह के पुराने विकास के दिनों को याद करके तेजी से बढ़ा कांग्रेस का ग्राफ

? नई पीढ़ी पर अर्जुन-इंद्रजीत के विकास कार्योँ को नया आयाम देने की अपेक्षाओं का बोझ

Main Ad1

आर.बी.सिंह ‘राज’ । सीधी

मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019 के रण में सीधी लोकसभा सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ही सीधी लोकसभा सीट साख का सवाल बन गई है। एक तरफ सांसद रीति पाठक इस सीट पर दूसरी बार जीतने की तैयारी कर रही हैं, तो वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के लिए सीधी सीट जीतना प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। ऐसे में इस बार सीधी लोकसभा सीट में किसकी किस्मत चमकेगी ये तो जनता ही तय करेगी, लेकिन बीरबल की नगरी के तौर विख्यात सीधी की चुनावी तपिश के बीच विकास कार्यों का लेखा-जोखा भी क्षेत्र का जनमानस लगा रहा है। ऐसे में यह अांकलन बेहद महत्वपूर्ण है कि आखिर किसके कार्यकाल में विकास कार्यों की पृष्ठभूमि बनी और अब उन विकास कार्यो को एक नया आयाम देने में कौन सा जनप्रतिनिधि सक्षम है।

? अतीत पर नजर

यदि सीधी संसदीय क्षेत्र को मिली सरकारी सौगातों व उपलब्धियों की बात करें तो इस क्षेत्र के विकास को जो अमली जामा पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने पहनाया वह अब भी नजीर है। उन्होने अपने राजनैतिक सहयोगी रहे स्व. इंद्रजीत पटेल के साथ मिलकर जिस प्रकार से विकास की इबारत लिखी , उससे यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बना बल्कि उन बुनियादी सुविधाओं से भी लैस हुआ जिन सुविधाओं से यहां के आदिवासी परिवारों का जीवन स्तर बदल सकता था। इसे संयोग ही कहना चाहिए कि मौजूदा दौर में स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह राहुल व स्व. इंद्रजीत पटेल के पुत्र कमलेश्वर पटेल न केवल सक्रिय राजनीति में हैं, बल्कि अपने पिता के विकास कार्यों को नया आयाम देने की अपेक्षाओं का बोझ भी उठा रहे हैं। अजय सिंह राहुल यहां से कांग्रेस प्रत्याशी हैं जबकि कमलेश्वर पटेल मप्र शासन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं।

? लोग करते हैं बातें, बरसी थी सौगातें

आज जब चुनावी मौसम में विभिन्न दलों के प्रत्याशी अपनी-अपनी उपलब्धियां व भविष्य की योजनाएं गिना रहे हों, तो ऐसे समय में सीधी संसदीय क्षेत्र के रहवासी उन सौगातों को भी याद करते हैं जो उन्हें हासिल हुई हैं। सीधी और सिंगरौली की अधिकांश सौगातें कुं.अर्जुन सिंह के कार्यकाल की ही हैं। बेशक अब कुं. अर्जुन सिंह व इंद्रजीत पटेल दुनिया को अलविदा कह चुके हों लेकिन क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित उनकी जोड़ी को आज भी न केवल याद किया जाता है बल्कि अब उनके विकास कार्यों को एक और नया आयाम देने की अपेक्षा उनकी राजनैतिक विरासत संभाल रहे अजय सिंह राहुल व कमलेश्वर पटेल की ओर अपेक्षा से निहार भी रहा है। लोगों का मानना है कि दोनों मिलकर दो नहीं बल्कि एक और एक ग्यारह होते हैं। विकास कार्यो को आगे बढ़ाने का समय भी अनुकूल है क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है।

? शैक्षणिक व प्रशासनिक संस्थानों की लगी थी झड़ी

अविभाजित सीधी जिले में शैक्षणिक व प्रशासनिक संस्थानों को खोले जाने का श्रेय अर्जुन सिंह को ही जाता है। उन्होने शिक्षा पर फोकस करते हुए एकमात्र स्नातक महाविद्यालय को जहां स्नातकोत्तर बनाया वहीं बालिका शिक्षा को महत्व देते हुए पृथक से कन्या महाविद्यालय खुलवाया । सीधी जिले के हर कस्बे में यदि कॉलेज , संजय गांधी महाविद्यालय का नवीन भवन,बीटीआई का नवीन भवन,कन्या हाई सेकेंडरी स्कूल , हर गांव में शासकीय स्कूल भवन के अलावा केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, एकलव्य विद्यालय, जवाहरलाल नेहरू आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुरहट, जैसी शिक्षण संस्थाएं हैं, तो उसका श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

? सिंचाई के क्षेत्र में हुए थे उल्लेखनीय कार्य

सिंचाई को ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मूलमंत्र मानने वाले कुंवर अर्जुन सिंह ने बाणसागर व गुलाब सागर बांध परियोजना के जरिए संसदीय क्षेत्र के सैकड़ों गांवों तक लघु एवं मध्यम सिंचाई योजनाएं पहुंचाई जिससे एक बड़े भू भाग के रहवासी कृषि को लाभ का धंधा बनाकर आत्मनिर्भर बन सके। सिंचाई के क्षेत्र में गति प्रदान करने के लिए अधीक्षण यंत्री का कार्यालय खोला गया तथा देवसर में पृथक से लोक निर्माण विभाग संभाग खोला गया। उस दौरान जिला सिंगरौली , देवसर और गोपद बनास तीन तहसीलें थी लेकिन आज रामपुर नैकिन, चुरहट, सीधी, मझौली, मड़वास ,बहरी ,सिहावल, अमिलिया, चितरंगी ,देवसर व बैढन तहसील बनीं तो इसके पीछे भी उनका ही प्रयास था।

? सुरक्षा के लिए खोली गई थी कई चौकियां

सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सभी बड़े उप नगरीय क्षेत्रों में पुलिस थाना एसडीओपी व एसडीएम कार्यालय के अलावा तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा पुलिस चौकी स्थापित करा संसदीय क्षेत्र की सुरक्षा को एक नया आयाम दिया।

? पेयजल के लिए हुए थे उल्लेखनीय कार्य

अतीत की कांग्रेस सरकारों में कुंवर अर्जुन सिंह के प्रयास से क्योंकि उन्हें क्षेत्रवासियों के पेयजल की भी खासी चिंता थी जिसके लिए उन्होने ग्रामीण स्तर पर नल जल प्रदाय योजनाए, ट्यूबवेल जिसमें सीधी शहर की पेयजल योजना शामिल है को प्रारंभ कराया।
अर्जुन सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राजनैतिक व विकास कार्यो में काम करने वाले इंद्रजीत पटेल के पुत्र कमलेश्वर पटेल अब इन कामों को आगे बढ़ा रहे हैं।

? सिंगरौली में बरसाई थी सौगातें

आज यदि सिंगरौली उर्जाधानी बनकर विख्यात हुआ तो इसका श्रेय भी कुं. अर्जुन सिंह को जाता है। मामला सिंगरौली विकास प्राधिकरण की स्थापना का रहा हो अथवा नगर निगम की स्थापना का हो अथवा विंध्यांचल थर्मल पावर हवाई पट्टी की नींव रखने का, तकरीबन सभी में नींव के पत्थर अर्जुन सिंह ही बने थे।

? इसलिए चिंतित है भाजपा

सीधी लोकसभा क्षेत्र में 5 वर्षों में महज 20 फीसदी ही विकास कार्य हुआ है, जो भाजपा के चिंता का सबब है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभा कर यहां भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है लेकिन क्षेत्र में पार्टी नेताओं का विरोध व अजय सिंह के प्रति उपजी सहानुभूति से इस बार कांग्रेस का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। अर्जुन सिंह के चलते ही सीधी को जिले की सौगात मिली थी, ऐसे में क्षेत्रीय जनता विकास कार्यों को गति देने आमजनमानस अपेक्षाओं के साथ राहुल सिंह की ओर देख रहा है।

? राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर

यदि सीधी का चुनावी इतिहास देखें तो विंध्य की सीधी लोकसभा सीट उन अहम लोकसभा सीटों में गिनी जाती है जहां कभी कोई एक दल अपना प्रभुत्व नहीं जमा पा सका है।
ये ऐसी सीट रही है जिस पर कभी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा। सीधी सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव 1962 में हुआ था। 1962 के बाद अब तक 16 चुनाव हुए, जिसमें 6 बार कांग्रेस और 6 बार बीजेपी को जीत नसीब हुई है। यदि हम सीधी संसदीय क्षेत्र के चुनावी इतिहास पर गौर करें तो इस लोकसभा सीट पर अब तक 16 लोकसभा चुनाव हुए हैं जिनमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला रहा है।
हालांकि बीजेपी यहां पर पिछले 2 चुनाव लगातार जीतने में सफल रही है। 2019 का चुनाव जीतकर उसकी नजर यहां पर हैट्रिक लगाने पर है जबकि कांग्रेस यहां पर वापसी करने की रणनीति को धार दे रही है।

? भाजपा की विकास शून्यता भी है मुद्दा

इस बार के लोकसभा चुनाव में यह बात जो प्रमुखता से सामने आ रही है उसमें देखा जा रहा है कि पिछले 15 सालों में मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद सीधी संसदीय क्षेत्र में विकास के जिन कार्यों को जन अपेक्षाओं के मुताबिक गति मिलने की आस या आश्वासन था वह कहीं दूर दूर तक दिखाई नहीं देता। खासकर बीते पिछले 5 सालों की बात करें तो इस दौरान जहां प्रदेश में भाजपा की सरकार थी वहीं केंद्र में भी भाजपा की सरकार आने के बावजूद भी जिस तरीके के विकास की गंगा बहने की उम्मीद यहां के मतदाताओं ने लगा रखी थी वो उन्हें निराश कर गई।
भाजपा भले ही इस चुनाव में मोदी मोदी की रट लगाए हुए हो पर जब स्थानीय स्तर पर विकास की बात आती है तो उसे उसके सवालों के जवाब नहीं मिल पाते।

? कांग्रेस ने बनाया मुद्दा

वर्तमान के चुनाव प्रचार के दौरान इस बात को प्रमुख रूप से कांग्रेस ने मुद्दा बनाया जबकि भाजपा संसदीय क्षेत्र में विकास को मुद्दा बनाने की बजाय सिर्फ मोदी मोदी पर ही अटकी रही।
जब भाजपाइयों से विकास की बात की जाती थी तो वो सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय मोदी की रट लगाने लगते थे।


? राजनीतिक अतीत पर नजर

अतीत के कई दशकों के सीधी से जुड़े राजनीतिक सफर पर यदि नजर डालें तो यह क्षेत्र कुंवर अर्जुन सिंह के नाम से कई दशकों तक जाना जाता रहा फिर उसके बाद उन्होंने अपने अति निकटतम सहयोगी इंद्रजीत कुमार को यहां के विकास का सहभागी बनाया।
अब चुंकी अतीत के यह दोनों दिग्गज नेता इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं जिसके बाद इंद्रजीत कुमार पटेल के बेटे कमलेश्वर पटेल को विधानसभा चुनावों में मिली सफलता के उपरांत अब वो प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री बतौर कुछ नया करने और विकास को आयाम देने के लिए प्रयासरत हैं तो वही कुंवर अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह राहुल अब लोकसभा चुनावों में किस्मत आजमाते हुए लोकसभा सांसद के बतौर अपने पिता के पद चिन्हों को अपनाने के लिए इस बार कांग्रेस की तरफ से चुनावी मैदान में हैं।
इसी बात को लेकर कांग्रेसियों ने यहां पूरे चुनाव प्रचार के दौरान इस बात को मुद्दा बनाया की सीधी से एक कैबिनेट मंत्री प्रदेश सरकार का हिस्सा है जबकि दूसरे दिग्गज कांग्रेसी नेता को इस बार लोकसभा में बतौर सांसद विकास के लिए हिस्सा बनाना है।

?भाजपा हैट्रिक लगाने को बेताब

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए पिछले 5 वर्षों के विकास कार्यों को लेकर भाजपा ने यहां इसे ही अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रखा है। उसे पूरा यकीन है कि जिस तरह से पूरे देश में नरेंद्र मोदी के नाम पर भाजपा को वोट मिलते नजर आ रहे हैं वहीं बयार यहां सीधी में भी उसकी नैया पार लगाएगी।
वहीं दूसरी ओर अभी पिछले 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी मुख्यालय में एक बड़ी आम सभा से भाजपा यह मान कर चल रही है कि वह इस बार की अपनी हैट्रिक लगाने में पूरी तरह कामयाब होगी।
अब ऐसे हालात में सीधी संसदीय सीट पर जिसमें कल 29 अप्रैल को मतदान होना है देखना यह दिलचस्प रहेगा कि क्षेत्र की जनता किसके सिर पर सांसद का ताज पहनाती है।

आर.बी.सिंह ‘राज’ ✍️
【वरिष्ठ पत्रकार】,सीधी
? 942517600

News TOP Footer