! जिला दण्डाधिकारी अभिषेक सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया !

सीधी : धर्मेंद : जिला दण्डाधिकारी जिला सीधी अभिषेक सिंह ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत लोक शांन्ति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए जिला सीधी की सम्पूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। जारी आदेशानुसार जिला सीधी की सम्पूर्ण राजस्व सीमा क्षेत्र में किसी भी आपत्तिजनक अथवा उद्वेलित करने वाली वीडियों, आडियों, फोटो, मैसेज पोस्ट करने एवं उनकी फारवर्डिंग ट्वीटर, फेसबुक, वाट्सएप इत्यादि सोशल मीडिया पर करने तथा पोस्ट पर कमेंट करने की गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है।जारी आदेशानुसार यदि कोई व्यक्ति उर्पयुक्त आदेश का उल्लंघन करेगा तो उसके विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों के तहत अभियोजन किया जायेगा। उक्त आदेश दिनांक 01.05.2019 से 27.05.2019 तक प्रभावशील रहेगा तथा उक्त प्रभावशील अवधि में इस आदेश का उल्लंघन धारा 188 भा.द.वि. अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आयेगा। आदेश से व्यथित व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 (5) के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। अत्यंत विशेष परिस्थितियों में संतुष्ट होने पर जिला दण्डाधिकारी आवेदन की किसी भी लागू शर्तों में छूट दे सकेगा।जिला दण्डाधिकारी श्री सिंह ने बताया कि जिले की भौगोलिक सीमा अंतर्गत कतिपय व्यक्तियों, समूहों एवं संगठन के द्वारा सोशल मीडिया जैसे वाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम तथा अन्य इलेक्ट्रानिक डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट कर सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने एवं लोगो के मध्य संघर्ष/वैमनस्यता की स्थिति निर्मित करने हेतु तरह-तरह के संदेश, चित्रों, वीडियो एवं आॅडियो का प्रसारण किया जा रहा है। इंटरनेट पर इस प्रकार के वैमनस्यता की अभिव्यक्ति ऐसे पोस्ट के माध्यम से होती है जिस पर हर कोई बिना विचार किये एवं बिना किसी दायित्व के द्वेषपूर्ण एवं अश्लील शब्दों का प्रयोग कर जन भावनाओं को आहत करता है जिससे लोक व्यवस्था एवं सामाजिक शान्ति भंग हो सकती है। स्पष्ट है कि फेसबुक पर पोस्ट, कमेंट एवं लाइक तथा वाट्सएप पर आपत्तिजनक मैसेज एवं उनकी फारवर्डिंग, ट्वीटर पर आपत्तिजनक मैसेज आदि से लोक शान्ति भंग करने में प्रोक्सीमेट और डायरेक्ट नेक्सेसे रखते हैं। यह आचरण वर्तमान परिवेश में लोक व्यवस्था को भंग कर सकता है। इस आचरण से उपजी प्रक्रिया किसी व्यक्ति विशेष को अपराध कारित करने के लिये उद्दीप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के आचरण तथा संभावित अवांछित परिणाम में निकटस्त एवं प्रत्यक्ष संबंध विहित होकर इनका उपयोग विघटनकारी गतिविधियों के लिये किया जा सकता है। इन समस्त कारणों से मानव जीवन व लोक सम्पत्ति की क्षति संभावित है। इस तरह के गतिविधियों से जन समान्य के स्वस्थ्य व जानमाल को खतरा उत्पन्न हो सकता है व भविष्य में इन कारणों से लोकशान्ति भंग करने की प्रबल आशंकायें व्याप्त हो रही है। अतएव इस प्रकार की असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाये जाने की तत्काल आवश्यकता प्रतीत हो रही है। उक्त को दृष्टिगत रखते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।